सौ साल के बाद यह मंगल बेला आई....
जन्मशताब्दी गुरूवर की आई।
हरिद्वार की पावन धरती
आज फिर से है जगमगाई
अलख जगाकर रौशन कर दो
जन्मशताब्दी गुरूवर की आई।
नई उमंग है नई तरंग है
चारो तरफ हर्षोल्लास है
इस धरती पर सतयुग लाने
जन्मशताब्दी गुरूवर की आई।
गुरूवर के सपने सच होंगे
मन में यह विश्वास है
उनके सद्विचारों को फैलाने
जन्मशताब्दी गुरूवर की आई।
गुरूदेव का आशीष है हम पर
श्रद्धा से गुणगान करें
सत्पथ पर अग्रसर कराने
जन्मशताब्दी गुरूवर की आई।
देश-विदेश के लाखों लोग होंगे
इस दिव्य अलौकिक केन्द्र में
विश्व बन्धुत्व का भाव जगाने
जन्मशताब्दी गुरूवर की आई।
समता का पाठ पढ़ाने
राग-द्वेष सब बैर मिटाने
अपना आप बोध कराने
जन्मशताब्दी गुरूवर की आई।

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