Sunday, February 17, 2013

मुलाकात



ना जाने वो कौन सा पल था...
ना जाने उस पल में क्या बात थी...
एक ही पल में सब कुछ बदल गया...
ना जाने वो कैसी मुलाकात थी...
           क्या वो दिन थे, क्या वो रात थी...
           ठण्डी पवन थी और बिन मौसम बरसात थी...
           ना जाने उन बूंदों में क्या मिठास थी...
           ना जाने वो कैसी मुलाकात थी...
क्या वो सुबह थी, क्या वो शाम थी...
सूरज की किरणें और समुन्दर की आवाज थी...
ना जाने उस समुन्दर में क्या प्यास थी...
ना जाने वो कैसी मुलाकात थी...
           क्या वो आज था, क्या वो कल था...
           नील गगन में उड़ जाने का मन था...
           ना जाने उन पक्षियों को क्या तलाश थी...
           ना जाने वो कैसी मुलाकात थी...
क्या वो मैं थी, क्या वो तुम थे...
प्यार के रंगों से सजे ऐसे गुल थे...
ना जाने उन गीतों में क्या साज थी...
ना जाने वो कैसी मुलाकात थी...

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